अनबॉक्सिंग :- कैमरा लवर्स की डिमांड पूरी करेगा वीवो V17, हैवी वर्क के लिए मिलेगी 8GB रैम

  • खूबियां : इसमें आईव्यू डिस्प्ले, 48 मेगापिक्सल कैमरा और 18 वॉट की फास्ट चार्जिंग से लैस
  • खामियां : कीमत के मुताबित फोन का प्रोससर और बैटरी ज्यादा बेहतर हो सकती थी

चीनी कंपनी वीवो ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन वीवो V17 लॉन्च कर दिया है। साथ ही, इसकी प्री-बुकिंग भी शुरू कर दी है। कंपनी ने इसे फोटोग्राफी पर फोकस किया है। ये वीवो V17 प्रो सीरीज का हिस्सा है। स्मार्टफोन अपने हार्डवेयर, फीचर्स और कीमत की दम पर क्या भारतीय यूजर्स को पसंद आएगा। टेक एक्सपर्ट गौरव चौधरी (टेक्निकल गुरुजी) से इसकी अनबॉक्सिंग और फर्स्ट लुक के साथ जानते हैं।

1. बॉक्स में क्या मिलेगा?

बॉक्स के फ्रंट साइड में रैम और स्टोरेज का जिक्र किया गया है। बॉक्स के साइज में वीवो आईपीएल टाइटल स्पॉन्सर लिखा है। बैक साइज में फोन के मेन फीचर्स जैसे 48 मेगापिक्सल कैमरा, 32 मेगापिक्सल का सुपर सेल्फी कैमरा, नाइट मोड, आईव्यू डिस्प्ले को मेंशन किया है। बॉक्स के अंदर के सेक्शन में प्रीमियम क्वालिटी का केस, यूजर मैनुअल, सिम इजेक्टर टूल, यूएसीबी C-टाइप केबल और V17 प्रो हैंडसेट दिया है। इसके साथ, 18 वॉट का चार्जर और 3.5mm ईयरफोन एक्स्ट्रा ईयर बड्स के साथ दिया है।

2. हैंडसेट डायमेंशन और बटन पोजिशन

फोन के राइट साइट में पावर लॉक/अनलॉक बटन दिया है। इसके ठीक ऊपर वॉल्यूम रॉकर्स की दी हैं। फोन के लेफ्ट साइड में ट्रिपल स्लॉट वाली हाईब्रिड सिम ट्रे दी है। फोन में नीचे की तरफ 3.5mm ऑडियो जैक, प्राइमरी माइक्रोफोन, USB चार्जिंग पोर्ट और स्पीकर ग्रिल दी है। ऊपर की तरफ डुअल सेकंडरी माइक्रोफोन दिया है।

फोन के बैक साइड में क्वाड रियर कैमरा सेटअप दिया है। सभी लेंस को L लेटर के हिसाब से सेट किया गया है। इसमें डुअल LED फ्लैश दिया है। नीचे की तरफ कंपनी की ब्रांडिंग है।

3. फोन का डिस्प्ले

फोन में 6.44-इंच FHD+ सुपर एमोलेड पंचहोल डिस्प्ले टचस्क्रीन दी है। बॉडी में स्क्रीन रेशियो 84.9% है। यानी फोन में बेजल का हिस्सा बहुत कम मिलेगा। डिस्प्ले का रेजोल्यूशन 1080 x 2400 पिक्सल और पिक्सल डेनसिटी 409 ppi है। ये 16 मिलियन कलर्स को सपोर्ट करती है।

4. प्रोसेसर, रैम और मेमोरी

फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन SDM675 675 प्रोसेसर और ऑक्टा-कोर (2×2.0 GHz Kryo 460 गोल्ड और 6×1.7 GHz Kryo 460 सिल्वर) प्रोसेसर दिया है। इसका GPU एड्रेनो 612 है। ये ऑप्टिमाइज गेम मोड के साथ आता है। इसमें 8GB रैम और 128GB ऑनबोर्ड स्टोरेज दिया है। फोन स्टोरेज को 256GB माइक्रो SD कार्ड से बढ़ाया जा सकता है।

5. कैमरे में कितना दम?

फोन का बेस्ट पार्ट क्वाड रियर कैमरा और पंचहोल सेल्फी कैमरा है। इसमें 48MP वाइड लेंस (f/1.8), 8MP अल्ट्रावाइड लेंस (f/2.2), 2MP मैक्रो लेंस (f/2.4) और 2MP डेप्थ सेंसर (f/2.4) का कॉम्बिनेशन दिया है। बेहतर फोटोग्राफी के लिए इसमें डुअल-टोन LED फ्लैश दिया है। इसमें नाइट मोड का फीचर दिया है, जो रात में ली गई फोटो को ज्यादा बेहतर बना देता है। इसमें पैनोरामा, लाइव फोटो, स्लो-मोशन, टाइम लेप्स, प्रो, AR स्टीकर्स, Jovi, डॉक्युमेंट्स के साथ वाइड, अल्ट्रावाइड जैसे फोटोग्राफी ऑप्शन दिए हैं। ये 4K रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है।

सेल्फी के लिए इसमें 32MP वाइड लेंस (f/2.0) दिया है। जो HDR फीचर के साथ आता है। फ्रंट कैमरा से फुल HD वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।

6. ऑपरेटिंग सिस्टम और बैटरी

बैटरी : इसमें 4500mAh की बैटरी और 18W का USB टाइप C फास्ट चार्जर दिया है। फोन की बैटरी दिनभर की एक्टिविटी के लिए काफी है। अच्छी बात ये है कि बैटरी खत्म होने पर आधा घंटा की चार्जिंग पर इसे 5 से 6 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

ओएस : फोन में एंड्रॉयड का सेकंड लेटेस्ट 9.0 पाई ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनी के नए फनटच 9.2 ऑपरेटिंग सिस्मट के साथ दिया है। इसमें फोन की स्पीड बढ़ाने, बूस्ट करने, वायरस स्कैन करने, शॉर्टकट सेंटर के साथ कई काम के फीचर्स मिलेंगे।

7. कनेक्टिविटी और सिक्योरिटी फीचर्स

कनेक्टिविटी : फोन में Wi-Fi 802.11, Wi-Fi डायरेक्ट, हॉटस्पॉट, ब्लूटूथ 5.0, GPS, NFC, FM रेडियो, Type-C पोर्ट जैसे कनेक्टिविटी ऑप्शन दिए हैं। म्यूजिक के लिए इसमें 3.5mm जैक दिया है।

सिक्योरिटी : फोन में इन डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया है। जो बहुत तेजी से काम करता है। वहीं, फेस अनलॉक फीचर भी मिलता है।

8. कीमत और हमारी राय

वीवो ने फिलहाल इसे सिंगल वैरिएंट में लॉन्च किया गया है। 8GB+128GB वैरिएंट की कीमत 22,990 रुपए है। इसकी कैमरा क्वालिटी कमाल की है। हालांकि, जब बात कीमत की आती है तब इसमें प्रोसेसर की स्पीड थोड़ी कम नजर आती है। इस कमी को कंपनी ने 8GB रैम से पूरी करने की कोशिश की है। कैमरा लवर्स के लिए ये फोन बेस्ट ऑप्शन बन सकता है।

फर्जी लाइक और फॉलोअर्स से सोशल मीडिया कंपनियां परेशान, 23 हजार रु. में मिल जाते हैं 25 हजार लाइक, 5 हजार फॉलोअर

  • गड़बड़ी करने वाले 20 हजार अकाउंट की पहचान, अविश्वसनीय अकाउंट हटाने में ट्विटर सबसे आगे
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी काम करने वाले करीब 20 हजार अकाउंट खरीदे

बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर का फर्जीवाड़ा रोकने के प्रयासों को सफलता नहीं मिली है। नाटो स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन एक्सीलेंस सेंटर के शोधकर्ताओं की एक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक और टि्वटर जैसी कंपनियां इस गड़बड़ी के सामने असहाय हैं। कोई भी व्यक्ति पैसा देकर अधिक लाइक, कॉमेंट और क्लिक के लिए किसी कंपनी की सेवाएं ले सकता है।

खुलेआम काम कर रही हैं धांधली करने वाली कंपनियां

  1. उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को सलाह देने वाले स्वयंसेवी सेंटर ने टेक कंपनियों की 11 रूसी और 5 यूरोपीय कंपनियों को पैसा देकर चलाए जाने वाले अभियान को रोकने की क्षमता का परीक्षण किया है। शोधकर्ताओं ने 23 हजार रु. में 3500 कॉमेंट, 25 हजार लाइक, 20 हजार व्यू और 5 हजार फॉलोअर खरीद लिए । इनमें यूरोप की सर्वोच्च एंटी ट्रस्ट अधिकारी मार्गरेट वेस्टागर जैसे कई प्रमुख राजनेताओं के पोस्ट पर हुए लाइक शामिल हैं। चार सप्ताह बाद भी 80% फेक क्लिक बने हुए थे। टेक कंपनियों को इनकी खबर देने के तीन हफ्ते बाद तक क्लिक जनरेट करने वाले सभी अकाउंट बरकरार थे।
  2. रिपोर्ट ने फेसबुक, यूट्यूब और टि्वटर के सामने मौजूद चुनौतियों को सामने रखा है। रूस द्वारा 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में दखल के बाद कंपनियों ने झूठी खबरों के प्रसार से निपटने के लिए कई परिवर्तन किए थे। अभी हाल के महीनों में इन प्लेटफॉर्मों ने चीन, सऊदी अरब और अफ्रीका में कुछ अकाउंट बंद करने की घोषणा की है। यहां रूस नए तरीके आजमा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी काम करने वाले करीब 20 हजार अकाउंट खरीदे। उनकी पहचान की। उनके सैंपल इंटरनेट कंपनियों को भेजे। तीन सप्ताह बाद 95% अकाउंट ऑनलाइन एक्टिव थे।
  3. रिपोर्ट ने सोशल मीडिया नेटवर्क पर क्लिक, लाइक और कॉमेंट बेचने वाली कंपनियों के सामने इंटरनेट कंपनियों की कमजोरी पर एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है। कई कंपनियां रूस मेंं हैं। सोशल नेटवर्क के सॉफ्टवेयर सबसे अधिक लोकप्रिय पोस्ट को प्राथमिकता देते हैं। इससे पैसा देकर जनरेट की गई गतिविधि को प्रमुख स्थान मिलता है। शोधकर्ता सेबास्टियन बे का कहना है, हम सोशल मीडिया कंपनियों के नियमन और नियंत्रण पर बहुत अधिक सोचते हैं लेकिन सोशल मीडिया
    धोखाधड़ी इंडस्ट्री पर काबू पाने के बारे में उतना विचार नहीं करते हैं।
  4. शोधकर्ताओं ने पाया कि बड़ी टेक कंपनियां धांधली रोकने में नाकाम रही हैं। दूसरे नेटवर्क की तुलना में टि्वटर ने ज्यादा अकाउंट पहचाने और हटाए। टि्वटर ने खरीदे गए आधे लाइक और रिट्वीट हटा दिए गए। अविश्वसीय कंटेंट हटाने के मामले में यूट्यूब सबसे खराब पाई गई। फेसबुक फर्जी अकाउंट बनाने और ब्लॉक करने में सबसे अच्छा साबित हुआ लेकिन उसने फर्जी कंटेंट बहुत कम हटाया। इंस्टाग्राम में गड़बड़ी करना सबसे आसान और सस्ता रहा।
  5. धांधली की इंडस्ट्री में सैकड़ों लोग सक्रियशोधकर्ताओं ने मई से अगस्त के बीच धांधली करने वाली इंडस्ट्री से निपटने में सोशल नेटवर्क की क्षमता का परीक्षण किया था। उन्होंने फर्जीवाड़ा चलाने वाले सैकड़ों लोगों को पाया। वे पर्याप्त पैसा कमाते हैं। उन्होंने 16 लोगों को साइन किया। रिपोर्ट में कहा गया, इंडस्ट्री में खुलापन चौंकाने वाला है। सच तो यह है, धांधली करने वाले प्रोवाइडर मेजर प्लेटफॉर्म पर खुलेआम विज्ञापन करते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टि्वटर और यूट्यूब पर सैकड़ों पोस्ट को प्रभावित किया गया। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हैवी डिस्काउंट के लालच में ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए 56% भारतीय, 60% को चैरिटी-डोनेशन के नाम पर लूटा

  • मैकेफी के क्रिस्मस सर्वे रिपोर्ट में सामने आया कि 28.6% लोगों ने गलत साइट पर 20 हजार तक गवाएं
  • सर्वे में सामने आया कि 78.6% भारतीय सीजनल ट्रैवल स्कैम में ठगी का शिकार हुए

त्योहारों पर मिलने वाले हैवी डिस्काउंट कई बार ग्राहकों पर सही में भारी पड़ जाते हैं। मंगलवार को जारी हुई साइबर सिक्योरिटी कंपनी मैकेफी (McAfee) की रिपोर्ट के मुताबिक 56% भारतीयों को फेस्टिव सेल के दौरान डिस्काउंट स्कैम से ठगा गया जबकि 28.6% लोगों का कहना है कि डिस्काउंट के लालच में उन्होंने फर्जी ऑनलाइन रिटेल साइट पर 15 से 20 हजार रुपए तक गवां दिए।

ईमेल और टेक्स्ट फिशिंग के जरिए बनाया गया लोगों को शिकार

  1. ‘ए क्रिसमस कैरोल: स्कैम एडिशन’ नाम के सर्वे में सामने आया कि साल के अंत में होने वाली फेस्टिव सेल्स में भारतीय ग्राहकों को किस तरह से फंसाया जाता है। रिपोर्ट में बताया कि आधे से ज्यादा यानी करीब 53.6% ग्राहक गलत लिंक पर क्लिक करने से इस स्कैम का हिस्सा बनें क्योंकि इन लिंक पर क्लिक करते ही वह नकली साइट पर पहुंच गए, जहां वे ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए।
  2. साइबर क्रिमनल गतिविधियां अति संवेदनशील तरह से बढ़ती जा रही है। इसमें ईमेल फिशिंग (25.3%) और टेक्स्ट फिशिंग(21.1%) जैसे तरीकों लोगों को शिकार बनाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हीं तरीकों का फेस्टिव सीजन के दौरान भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया।
  3. 35.4% भारतीयों ने खुद इस बात को स्वीकार किया कि वे डिस्काउंट स्कैम में फंस चुके हैं, जिसका कारण उन्होंने डिवाइस में गलत फाइल का डाउनलोड होना बताया। पूरे फेस्टिव सीजन के दौरान 60.2% लोग रोबो कॉलिंग और 57.1% सिम जैकिंग जैसाी गतिविधि का शिकार हुए।
  4. ऐसा माना जाता है कि भारतीयों के लिए फैमिली वैकेशन पर जाना या यात्रा करना सबसे बड़ा एजेंडा रहता है। सर्वे में सामने आया कि 78.6% भारतीय सीजनल ट्रैवल स्कैम के शिकार हुए। नया तरीका जिसके जरिए ग्राहकों को फेस्टिव सीजन के दौरान शिकार बनाया गया वह है फोनी गिफ्ट कार्ड।
  5. करीब 39.3% भारतीयों ने माना कि वे उस साइट पर पहुंचे जहां उनसे नाम, टेलीफोन नंबर और क्रेडिट कार्ड जैसी निजी जानकारियां मांगी गई। वहीं 60.7% भारतीयों को फेक चैरिटी और डोनेशन के नाम पर ठगा गया। सर्वे में सामने आया कि 52.6% लोग जिनकी उम्र 18 से 24 साल के बीच थी को रोमांस स्कैम का सामना करना पड़ा वहीं इसी उम्र के 60% लोगों को ई-ग्रीटिंग के जरिए ठगा गया।
  6. मैकेफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और वाइस प्रेसिडेंट इंजीनियरिंग वेंकट कृष्णापुर ने बाताया कि छुट्टियों पर जाने के लिए भीड़ से बचने के लिए लोग ऑनलाइन बुकिंग को ज्यादा तवज्जो देते हैं, ऐसे में पेमेंट करने के दौरान साइबर अटैक का शिकार हो जाते हैं। जहां ज्यादातर लोग ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं ऐसे में वह डिस्काउंट लेते समय लापरवाह रवैया अपनाते हैं और फिशिंग अटैक, फ्रॉड, नकली वेबसाइट और वायरस के शिकार बन जाते हैं, जहां उनकी निजी जानकारियां आसानी से चुरा ली जाती हैं।

2019 में सबसे ज्यादा सर्च हुआ ‘क्रिकेट वर्ल्डकप’, दूसरे नंबर पर रहा ‘लोकसभा इलेक्शन’

गूगल ने बुधवार को साल 2019 में अपने प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा सर्च किए गए विषयों की लिस्ट जारी की है।इसमें ‘क्रिकेट वर्ल्ड कप’ टॉप पर रहा जबकि दूसरे स्थान पर ‘लोकसभा इलेक्शन’ रहा। टॉप-10 सर्चिंग लिस्ट में 4 फिल्में शामिल हैं। इनमें से 3 हॉलीवुड की हैं। इस सूचीके जरिए गूगल ने बताया है कि इस साल दुनिया में और भारत में क्या सर्च किया गया। सर्च इंजन नेइसका वीडियो भी शेयर किया है।

2019 में ओवरऑल टॉप-10 सर्च

  1. क्रिकेट वर्ल्ड कप 
  2. लोकसभा इलेक्शन
  3. चंद्रयान 2
  4. कबीर सिंह
  5. एवेंजर्स एंडगेम
  6. आर्टिकल 370
  7. नीट रिजल्ट
  8. जोकर
  9. कैप्टन मार्वल
  10. पीएम किसान योजना

सर्च हुए टॉप-10 गाने

गूगल ने सबसे ज्यादा सर्च किए गएटॉप-10 गानों की लिस्ट भी जारी की है। इसमेंले फोटो ले.., तेरी मेरी कहानी, तेरी प्यारी-प्यारी दो अंखियां, वास्ते, कोका-कोलातू, गोरी तेरी चुनरी बा लाल रे, पल-पल दिल के पास, लड़की आंख मारे,पायलिया बजनी लाडो पिया और क्या बात है शामिल हैं।

सर्च हुईं टॉप-10 फिल्में

2019 में सबसे ज्यादा सर्च हुईं फिल्मों में शाहिद कपूर कीकबीर सिंह, एवेंजर्स एंडगेम, जोकर, कैप्टन मार्वेल, सुपर-30, मिशन मंगल, गली बॉय, वॉर, हाउसफुल 4 और उरी शामिल है।

सबसे ज्यादा सर्च हुईं टॉप 10 शख्सियतें

साल की दस बड़ी शख्सियतों की सूची में पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान शामिल हैं। उनके अलावालता मंगेशकर, युवराज सिंह, आंनद कुमार, विक्की कौशल, ऋषभ पंत, रानू मंडल, तारा सुतारिया, सिद्धार्थ शुक्ला और कोइना मित्रा टॉप-10 सर्च में शामिल रहीं।

गूगल पर क्रिकेट विश्व कप को सबसे ज्यादा बार सर्च किया गया

2019 में गूगल पर सबसे ज्यादा क्रिकेट विश्व कप के बारे में लोगों ने सर्च किया। इसके अलावाप्रो कबड्‌डी लीग, विंबलडन, कोपा अमेरिका, फ्रेंच ओपन, सुपर बॉल, द एशेज, यूएस ओपन और इंडियन सुपर लीग टॉप स्पोर्ट्स सर्चिंग में रहे।

खबरों में सबसे ज्यादा सर्च किए गए यहटॉपिक
लोकसभा चुनाव नतीजे, चंद्रयान-2, अनुच्छेद 370 के साथ ही प्रधानमंत्री किसान योजना के बारे में काफी सर्च किया गया। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, हरियाणा विधानसभा चुनाव नतीजे, पुलवामा हमला, साइक्लोन फानी, अयोध्या फैसला, अमेजन फॉरेस्ट फायर की खबरों को भी खूब सर्च किया गया।

बायोमेट्रिक के इस्तेमाल पर रोक संभव, एलेक्सा और गूगल होम सेवाओं पर होगा असर

केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन पेश कर दिया। इस बिल के तहत भारतीयों का सेंसटिव डेटा भारत में ही स्टोर करना होगा, लिमिटेड डेटा को ही विदेश में स्टोर किया जा सकेगा। सरकारी एजेंसियों को निजी और संवदेनशील डेटा को एक्सेस और कलेक्ट करने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि विपक्ष की आपत्तियों के बाद इसे संसद की ज्वाइंट सेलेक्शन कमेटी के पास अध्ययन के लिए भेज दिया गया है। अब बजट सत्र से पहले कमेटी बिल पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

बिल के प्रावधान के मुताबिक सरकार किसी भी इंटरनेट सोशल मीडिया प्रोवाइडर (गूगल, ट्विटर, एमेजॉन, फेसबुक, व्हाट्सऐप, फ्लिपकार्ट और एपल जैसी कंपनियों) से डेटा हासिल कर सकेगी। इंडस्ट्री के जानकारों की मानें तो नए बिल से गूगल और अमेजन जैसे कंपनियों को बायोमेट्रिक डेटा हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में वॉयस असिस्टेंस आधारित सेवाएं जैसे एलेक्सा और गूगल होम, गूगल ट्रांसलेट काम करना बंद कर सकते हैं। अमेजन वॉयस कमांड के आधार पर शॉपिंग की सुविधा शुरू करने जा रही है, जिस पर नए बिल का सीधा असर देखा जा सकेगा।

टेक कंपनियां एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर इन सुविधाओं को और उन्नत बनाने की कोशिश में हैं। इस बिल से भारत में इनकी योजनाओं को झटका लग सकता है। नए बिल के क्लॉज 92 में स्पष्ट किया गया है कि कोई फर्म या फिर कंपनी बायोमेट्रिक डेटा नहीं ले सकेगी, जब तक उसे सरकार की तरफ से इजाजत नहीं मिल जाती है।

नए बिल के तहत कंपनियों को यूजर्स का डेटा भारत में स्टोर करना होगा

  1. मोबाइल कंपनियों को इंफ्रा तैयार करना होगानए बिल के क्लॉज 92 के तहत बायोमेट्रिक डेटा, फिंगरप्रिंट स्कैनर, वाइस कमांड टूल, आइरिश, फेस स्कैनर समेत अन्य बायोमेट्रिक डेटा का एक्सेस करना मुश्किल हो जाएगा। इसका असर डिजिटल कॉमर्स और बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर समेत हर एक सेक्टर पर देखने को मिलेगा। मोबाइल फोन निर्माताओं को नए बिल के तहत यूजर्स का डेटा भारत में ही स्टोर करना होगा। इसके लिए मोबाइल निर्माता कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा।
  2. उल्लंघन पर कंपनियों को देना होगा तगड़ा जुर्मानाव्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए एक प्राधिकरण स्थापित करने और प्रावधानों का उल्लंघन होने पर कठोर दंड निर्धारित करने की भी बात कही गई है। बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के मामले में उल्लंघन होने पर 15 करोड़ रुपए या वैश्विक कारोबार के 4 फीसदी तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है, जबकि डेटा ऑडिट से जुड़े उल्लंघन में पांच करोड़ या वैश्विक कारोबार के दो फीसदी तक का जुर्माने का प्रस्ताव है।
  3. सरकारी कंपनियों को छूट का प्रावधानव्यक्तिगत डेटा संरक्षण के लिए बनाए जाने वाले कानून के लिए तैयार विधेयक के मसौदा में सरकारी एजेंसियों को क्रेडिट स्कोर, कर्ज वसूली और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बिना डेटा मालिक की सहमति के आंकड़ों का प्रसंस्करण करने की छूट दिए जाने का प्रावधान किया गया है। दिलचस्प बात है कि यह मसौदा सरकार को इस बात का अधिकार देता है कि वह किसी भी सरकारी एजेंसी को प्रस्तावित कानून के प्रावधानों के दायरे से छूट दे सकता है।
  4. बिना सहमति डेटा लिया तो होगी कार्रवाईइलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने बताया कि विधेयक के अनुसार अगर डेटा किसी की सहमति के बगैर लिया गया तो आपको दंड का भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर आप सहमति से परे जाकर डेटा का दुरुपयोग करते हैं, तो आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसलिए इस डेटा प्रोटेक्शन बिल के जरिए भारतीयों के अधिकार की रक्षा करते रहेंगे।
  5. साइबर एक्सपर्ट डेटा प्रोटेक्शन की वर्तमान जरूरतों के हिसाब से यह बिल ठीक है। पर इसमें सख्त प्रावधानों से परहेज किया गया है। निजता के अधिकार के उल्लंघन पर रोक लगाने में यह विफल हो सकता है। कुल मिलाकर बहुत सारी चुनौतियां हैं। क्रिटिकल डेटा को ठीक तरह से परिभाषित नहीं किया गया है। आरबीआई भारत में डेटा स्टोर करना चाहता था लेकिन इस बिल में इसके उलट प्रावधान हैं। – पवन दुग्गल, साइबर एक्सपर्ट

बोट स्टोन 200A पोर्टेबल स्मार्ट स्पीकर लॉन्च, बोलने भर से प्ले करेगा गाना, दिनभर के जरूरी काम भी याद दिलाएगा

म्यूजिकल इक्विपमेंटबनाने वाली कंपनी बोट ने भारतीय बाजार में अपने पोर्टेबल स्मार्ट स्पीकर बोट स्टोन 200A को लॉन्च कर दिया है। यह स्मार्ट स्पीकर बिल्ट-इन एलेक्सा यानी गूगल के वॉयस असिस्टेंट फीचर से लैस है। यह बोलने भर सेयूजर का पसंदीदा गाना प्ले करेगा वहीं साइज में छोटे होने सेइसे कही भी आसानी से ले जाया जा सकता है। इसकी कीमत 3,490 रुपए है लेकिन डिस्काउंट के तहत इसे 1,499 रुपए में खरीदा जा सकता है। अमेजन से खरीदी करने वाले ग्राहकों को 100 रुपए का कैशबैक अमेजन पे बैलेंस के रूप में मिलेगा।

बोट स्टोन 200A स्मार्ट स्पीकर

न्यूज और मौसम की जानकारी भी बताएगा

  1. यह छोटा और पोर्टेबल स्पीकर गूगल वॉयस असिस्टेंट फीचर से लैस है। यह यूजर को ताजा समाचार और मौसम की जानकारी भी बताएगा।
  2. बोट स्टोन 200 ए को घर में मौजूद अन्य स्मार्ट डिवाइस से भी कनेक्ट किया जा सकता है, जिन्हें एलेक्सा फीचर के जरिए कंट्रोल कर सकते हैं।
  3. इसमें डेली रिमाइंडर और अलार्म समेत स्मार्ट असिस्टेंट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसे बोट लाइफस्टाइल और एलेक्सा ऐप से कंट्रोल किया जा सकता है।
  4. इसमें 1500 एमएएच की लिथियम बैटरी है। कंपनी का दावा है कि सिंगल चार्जिंग में यह 8 से 10 घंटा का बैकअप देती है।
  5. इसे फुल चार्ज होने में मात्र तीन घंटे का समय लगता है। इसके साथ एक साल की वारंटी भी मिलती है।
  6. इसे IPX6 रेटिंग दी गई है, यानी यह वॉटर रेजिस्टेंट है। इसके साथ एक मीटर के रेंज तक वायरलेस कनेक्टिविटी मिलती है।
  7. इसकी कीमत 3,490 रु. है लेकिन ऑफर के तहत इसे 1,499 रु. में खरीदा जा सकता है
  8. इसमें 1500mAh लिथियम बैटरी है, जो सिंगल चार्जिंग में 10 घंटा का बैकअप देती है

Nokia C1 एंड्रॉयड गो एडिशन स्मार्टफोन हुआ लॉन्च, जानें फीचर्स

Nokia C1 एंड्रॉयड गो एडिशन स्मार्टफोन हुआ लॉन्च, जानें फीचर्स

Nokia C1

  • Nokia C1 एंड्रॉयड गो एडिशन पर चलता है
  • इसमें फोटोग्राफी के लिए 5MP कैमरा दिया गया है

Nokia के ब्रांड लाइसेंसी HMD ग्लोबल ने लेटेस्ट एंड्रॉयड गो एडिशन स्मार्टफोन Nokia C1 को लॉन्च कर दिया है. इस फोन को बिना किसी नॉच, होल-पंच या पॉप-अप कैमरे के ट्रेडिशनल स्मार्टफोन डिजाइन में पेश किया गया है. इस फोन की खास बातों का जिक्र करें तो इसमें क्वॉड-कोर प्रोसेसर, 1GB रैम और 2,500mAh की बैटरी दी गई है. HMD ग्लोबल ने इस स्मार्टफोन को उन ग्राहकों के लिए खास बताया है जो पहली बार फीचर फोन से स्मार्टफोन में शिफ्ट हो रहे हैं.

आपको बता दें इस स्मार्टफोन में 4G कनेक्टिविटी नहीं दी गई है. HMD ग्लोबल के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर Juho Sarvikas ने कहा कि ग्राहकों को इस फोन में 3G कनेक्टिविटी के साथ कम कीमत में बेहतरीन क्वालिटी मिलेगी. Nokia C1 की कीमत का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है. हालांकि ये जानकारी सार्वजनिक है कि इसे अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और एशिया पैसिफिक के बाजारों में उतारा जाएगा. ग्राहक इस स्मार्टफोन को ब्लैक और रेड कलर ऑप्शन में खरीद पाएंगे.

Nokia C1 के स्पेसिफिकेशन्स

डुअल-सिम (नैनो) सपोर्ट वाला ये स्मार्टफोन एंड्रॉयड 9 पाई (गो एडिशन) पर चलता है. इस फोन में 5.45-इंच FWVGA+ IPS डिस्प्ले दिया गया है. इस स्मार्टफोन में 1.3GHz की स्पीड वाला क्वॉड-कोर प्रोसेसर मौजूद है. इसके बाकी स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो इसमें माइक्रो-USB पोर्ट, डेडिकेटेड गूगल असिस्टेंट बटन और 1GB रैम दिया गया है.

फोटोग्राफी के लिए इसके रियर में f/2.4 अपर्चर के साथ सिंगल 5MP कैमरा दिया गया है. इसके अलावा सेल्फी के लिए फ्रंट में भी 5MP का कैमरा मौजूद है. साथ ही यहां फ्रंट और बैक में फ्लैश भी दिया गया है. इस स्मार्टफोन की बैटरी 2,500mAh है. इसे रिमूव भी किया जा सकता है. इसके अलावा इसमें 3.5mm ऑडियो जैक, FM रेडियो, 16GB की इंटरनल मेमोरी और 3G का सपोर्ट दिया गया है.

हैदराबाद दुष्कर्म के बाद 1.3 लाख लोगों ने ‘सुरक्षा’ एप डाउनलोड किया, पुलिस का दावा- 7 सेकंड में रिस्पॉन्स मिलेगा

हैदराबाद में वेटरनरी डॉक्टर से दुष्कर्म औरहत्या के बाद, बेंगलुरूके 1.3 लाख लोगों ने’सुरक्षा’ एप डाउनलोड किया है। बेंगलुरूपुलिसके डिप्टी कमिश्नर कुलदीप जैन ने कहा- पिछले हफ्ते हुए हैदराबाद में हुए गैंगरेपकेबाद, पहली बारएक हफ्ते के अंदर इतनी बड़ी तादाद में लोगों ने इस एप कोडाउनलोड किया।

इस एप को2017 में लॉन्च किया गया था और अब तक 2.8 लाख लोग इसे डाउनलोड कर चुके हैं।पुलिस का दावा है किएप परमात्र 7 सेकंड में रिस्पॉन्स मिलेगा।शहर के सभी पुलिस स्टेशनों में दो पेट्रोलिंग व्हीकल तैनात किए गए हैं, जो एप पर आए इमरजेंसी कॉल पर तुरंत कार्यवाही करेंगे।

एप को कोई भी इस्तेमाल कर सकता है: महिला-पुरुष का भेद नहीं

‘सुरक्षा’ एपपूरी तरह जेंडर न्यूट्रल है इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता है। जैन ने कहा कि पुरुष भी इसे बढ़-चढ़ कर इस्तेमाल कर रहे हैं। लॉन्चिंग के समय इसे इतना अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला, लेकिन अबइसके डाउनलोड्स में इजाफा हुआ है। 3 दिसंबर को बेंगलुरूपुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने लोगों से सुरक्षा एप का इस्तेमाल करने की अपील की थी, ताकि खतरे के समयजल्द से जल्द सहायता मुहैया कराई जा सके। पुलिस और प्रशासन ने लोगों को जागरुक करने के लिए कई कार्यक्रम भी आयोजित किए।

गूगल प्ले स्टोर पर महिला सुरक्षा के 200+ ऐप, लेकिन सिर्फ 20% ही काम के – रिपोर्ट

  1. रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल प्ले स्टोर पर वुमन सेफ्टी के 200 से ज्यादा ऐप्लीकेशन्स मौजूद हैं। लेकिन इनमें 20 फीसदी ऐप ही ऐसे हैं जोउपयोगी हैं। केन्द्रीयएजेंसियों को सायबर क्राइम की ट्रेनिंग दे चुके दिनेश ओबेरजा ने बताया कि गूगल प्ले स्टोर परवुमन सेफ्टी से संबंधित दो तरहके ऐप हैं। एक में आपातकाल में सूचना सीधे पुलिस को मिलती है। दूसरे प्रकार के ऐप में घरवालों को जानकारी मिलती है। गूगल प्ले स्टोर के ऐप का विश्लेषण किया था तो करीब 20 फीसदी ऐप ऐसे हैं, जिनमें सीधे सूचना पुलिस को जाती है। इन ऐप्स की रेटिंग भी चार या उससे ज्यादा है। करीब इतने ही ऐप के दूसरे फीचर्स महिलाओं के लिए ज्यादा उपयोगी हैं।
  2. मध्यप्रदेश: एक लाख से ज्यादा लोगों ने पुलिस का ऐप इंस्टॉल कियामध्यप्रदेश में लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्ले स्टोर परएमपीईकॉप ऐप मौजूद है। इसे एक लाख से ज्यादा लोग इंस्टॉल कर चुके हैं। इसमें ‘एसओएस’ बटन की सुविधा दी गई है, जिसेदबाते ही ऐप में फीड किए गए पांच इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्सतक मैसेज पहुंच जाता है। इसमें से एक मैसेज पुलिस के पास भी पहुंचता है, जिसके बाद लोकेशन के आधार पर सहायता मुहैया कराई जाती है। इसके अलावा भी ऐप में कई सुविधाएं हैं, जिनमेंगुमशुदा लोगोंऔर चोरी हुए वाहनों की जानकारी शामिल है।
  3. राजस्थान: एक लाख लोग चला रहे हैं ऐपयहां महिला सुरक्षा के लिए राजकॉप ऐप है। इसे करीब एक लाख लोगों ने डाउनलोड किया है। ऐप पर हर महीने करीब 200 शिकायतें आती हैं। इसमें एसओएस बटन हाेता है। बटन काे दबाने पर लाेकेशन और संबंधित थाने की जानकारी कंट्राेल रूम के पास चली जाती है। कंट्राेल रूम से एक मिनट से भी कम समय में रिटर्नकाॅल आता है।
  4. दिल्ली: चल रहे हैं दो ऐप, एक लाख यूजर्सदिल्ली में महिला सुरक्षा के दो ऐप हैं: हिम्मत प्लस और तत्पर। हिम्मत प्लस ऐप में मोबाइल को जोर से हिलाकर भी सूचना सीधे पुलिस कंट्रोल रूम में जाती है। तत्पर ऐप की शुरुआत उपराज्यपाल अनिल बैजल ने की थी। ऐप के जरिए 50 से ज्यादा सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। दोनों के एक लाख से ज्यादा यूजर्स हैं।
  5. उत्तर प्रदेश : एक दर्जन ऐप शुरू हुए, अब सब बंदयूपी में महिला अपराध को रोकने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर हेल्पलाइन और ऐप बनाए गए, लेकिन कोई भी ऐप सफल नहीं हो पाया। करीब एक दर्जन से ज्यादा मोबाइल ऐप सिर्फ़ ट्रायल तक शुरू हुए और बंद हो गए। हालांकि महिलाओं के लिए हेल्पलाइन नम्बर 1090 एक्टिव है।

जेबीएल ने लॉन्च किए ट्रूली वायरलेस ईयरबड्स, 8 हजार रु. कीमत, 15 मिनट की चार्जिंग में 1 घंटे सुने गाने

ऑडियो प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी जेबीएल ने भारतीय बाजार में अपने लेटेस्ट ट्रूली वायरलेस ईयरबड्स C100TWS’ लॉन्च किए। कंपनी का कहना है कि इसे खासतौर से भारतीय ग्राहकों के लिए ही डिजाइन किया गया है। यह यूजर को प्योर बेस साउंड क्वालिटी मुहैया कराएगा। इनकी कीमत 7,999 रुपए है। इसे 12 दिसंबर से ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकेगा। इसे प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है।

एक क्लिक से सिरी और गूगल असिस्टेंट एक्सेस कर सकेंगे

  1. कंपनी का कहना है कि इन दोनों ईयरबड्स में 17 घंटे की कम्बाइंड बैटरी लाइफ मिलती है।
    • इसकी चार्जिंग की स्पीड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 15 मिनट की चार्जिंग में यह एक घंटे तक चलता है।
    • नए C100TWS यूजर को न सिर्फ परफेक्ट म्यूजिक का अनुभव देते हैं बल्कि हैंड्स-फ्री स्टीरियो कॉलिंग की सुविधा भी देता है।
    • इसमें सारे कंट्रोल्स ईयरबड पर ही मिल जाते हैं बल्कि सिंगल क्लिक से सिरी और गूगल असिस्टेंट भी एक्सेस किया जा सकता है।
    • इसमें ब्लूटूथ वर्जन 5 कनेक्टिविटी के अलावा प्योर बेस साउंड के लिए 5.8 एमएम ड्राइवर मिलता है।
    • इसे रियरमी एयरबड्स के पहले ही बाजार में लॉन्च कर दिया गया है। रियलमी 17 दिसंबर को वायरलेस ईयरबड्स लॉन्च करेगी। इनकी कीमत 5 हजार रु. तक होगी

गूगल ने पेश किया नया क्रोम वर्जन 79 , पासवर्ड चोरी होने पर यूजर को तुरंत देगा उसे बदलने की सलाह

 यूजर्स को बेहतर पासवर्ड प्रोटेक्शन मुहैया कराने के लिए गूगल ने क्रोम वर्जन 79 पेश किया है। इसमें लेटेस्ट टेक्नोलॉजी समेत पहले से कहीं बेहतर सेफ्टी फीचर देखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि इस वर्जन के जरिए पासवर्ड चोरी या डेटा लीक होने की स्थिति में यूजर तक जानकारी पहुंच जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही कोई आपके निजी जानकारी जैसे यूजरनेम और पासवर्ड को किसी अन्य संवेदनशील वेबसाइट या ऐप पर इस्तेमाल करेगा, नया वर्जन यूजर को तुरंत इन्हें बदलने की सलाह देगा।

फिशिंग प्रोटेक्शन को और बेहतर बनाएगी कंपनी

  1. फोर्ब्स ने मंगलवार को रिपोर्ट में बताया कि यूजर इस नए फीचर को सिंक और गूगल सर्विस ने जाकर क्रोम सेटिंग के जरिए कंट्रोल कर सकेंगे। कुछ दिनों में इसे सभी क्रोम यूजर्स के लिए रोल-आउट कर दिया जाएगा।
  2. कंपनी फिलहाल अलग ब्राउजर एक्सटेंशन या पासवर्ड चेकअप टूल में दोबारा इस्तेमाल किए गए पासवर्ड को लेकर चेतावनी दे रही थी लेकिन अब क्रोम इसमें बदलाव कर रहा है ताकि यूजर को वेबसाइटों में लॉग इन करने के लिए चेतावनी प्रदान कर सकें।
  3. हालांकि गूगल अब यूजर को पासवर्ड इस्तेमाल करते हुए देख तो सकेगा लेकिन वह लॉगइन संबंधित निजी जानकारी नहीं देख सकेगा।
  4. रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल इसमें ट्राइड और टेस्टेड इंक्रिप्शन तकनीक इस्तेमाल करेगी, जो प्लेन टेक्स्ट देखे बगैर बड़ी मात्रा में चोरी हुई निजी जानकारियों में से एक पासवर्ड ढूंढ निकालेगा।
  5. पासवर्ड वार्निंग फीचर के अलावा कंपनी फिशिंग प्रोटेक्शन को रियल टाइम ऑप्शन के साथ और बेहतर बनाने को लेकर काम करेगी।